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गरुड़ पुराण : कुछ ख़ास बाते जो आपको पता होनी चाहिए।

गरुड़ पुराण हिन्दू धर्म की प्रसिद्ध पुराणों में से एक माना गया है। 18 महा-पुराणों में गरुड़ पुराण का एक अपना अलग महत्व है क्युकी इसके देव सुय्म नारायण  माने जाते है। गरुड़ पुराण के अनुसार हमारे कर्मो का फल हमे हमारे जीवन में तो मिलता ही है पर मरने के बाद भी कर्मो का अच्छा बुरा फल मिलता है। 

मृत्यु से पहले मिलने वाले संकेत, इसमें जीवन से लेकर मृत्यु और उसके बाद के आत्मा के सफर के बारे में भी बताया गया है। बहुत लोग समझते है की गरुड़ पुराण मनुष्य को डराने के लिए लिखा गया है, या केवल मृत्यु के बाद ही इसका पाठ किया जाता है लेकिन ये सच नहीं है। 

गरुड़ पुराण सूयम भगवान नारायण की वाणी है जिसमे इंसानो के कर्म के अनुसार उसको फल प्राप्त होता है इसमें बताई गयी बाते आपको बुराई से दूर कर अच्छाई के रस्ते में चलने के लिए बताई गयी है। 


Garuda Purana Facts


गरुड़ पुराण के अनुसार मृत्यु से पहले के संकेत -


(1) परछाई -  

जब किसी प्राणी का समय समाप्त होने वाला होता है तो उसको तेल और पानी में अपनी परछाई दिखना बंद हो जाती है, या धुंधली हो जाती है। 

(2) आँख की रौशनी - 

मृत्यु का समय नज़दीक आने पर प्राणी की आँखों की रौशनी पूरी तरह समाप्त होने लगती है उसके अपने आस-पास बैठे लोग दिखना बंद हो जाते है।   

(3) पूर्वज - 

जो कोई वियक्ति अपने पूर्वजो से अधिक जुड़ा रहता है तो उसके अंत समय आने पर उसे उसके पूर्वज की परछाई/आत्मा दिखने लगती है, यदि वियक्ति को अपने पूर्वज की याद आने लगे या वो दिखाई देने लगे तो समझ ले उनका समय निकट आ गया है।  

(4) आइना - 

जब किसी मनुष्य को आईने में अपने चेहरे के अलावा दूसरा चेहरा दिखने लगे या फिर अपना ही चेहरा धुंधला दिखने लगे तो उसको समझ जाना चाहिए की उसका समय निकट आ चूका है। 

(5) शरीर का रंग - 

जब शरीर में हल्का पीला और हल्का लाल पन लगने लगे तब समझ जाना चाहिए की वह मृत्यु के करीब है।    

(6) चन्द्रमा - 

जिस समय मनुष्यो को चद्र्मा में दरार दिखने लगे तो उसको समझ जाना चाहिए की ये उसके आखरी पल है।   

(7) सूर्य की चमक - 

यदि किसी मनुष्य को सूर्य की चमक ज्यादा लगने लगे तो ये भी एक मृत्यु का संकेत माना गया है।   

(8) दिव्या प्रकाश -  

जिस वियक्ति ने जीवन भर पुण्य अच्छे कर्म किये होते है उसके अंत समय में उसको दिव्या रौशनी नज़र आने लगती है, लेकिन वह इससे घबराता नहीं है और न ही उसके परिजनों को उसकी कोई कमी खलती है। ऐसे वियक्ति समय-समय पर अपने का प्रमाण देते रहते है, और समय-समय पर अपने परिजनों की किसी न किसी तरह से मदद भी करते है।   


ध्यान दे ➨ 

जब किसी मनुष्य को ऐसे संकेत दिखने लगे तो उसको समझ जाना चाहिए की उसके पास अब कम समय बचा है, उसको अपने कुछ महंतपुर्ण कार्य कर लेने चाहिए और अपना ध्यान परमात्मा में लगाना चाहिए, क्युकी भगवान का ध्यान करने से हो सकता है की उसने जो जाने-अनजाने में पाप किये हो वो समाप्त हो जाए। 


गरुड़ पुराण के अनुसार कैसी होती है मृत्यु के बाद यमलोक की यात्रा - 


मृत्यु जीवन का सबसे बड़ा सच है महा परुषो के अनुसार मृत्यु के बाद दिव्या दृस्टि प्राप्त होती है, और मृत्यु के बाद यमलोक की यात्रा शुरू होती है। ये सारी बाते श्री विष्णु जी ने अपनी सवारी गरुड़ को विस्तार पूर्वक बताई है। गरुड़ पुराण के अनुसार बताया गया है की मृत्यु के बाद प्राणी की आत्मा को भिन्न-भिन्न जगहों से गुजरना पड़ता है। 

फिर उनको धर्म राज दुवारा उनके पाप या पुण्य के हिसाब से आगे के सफर में भेजा जाता है, मृत्यु से पहले मनुष्य की आवाज चली जाती है, उसकी सारी इन्द्रियां बंद पड़ जाती है। जब अंतिम समय आता है उसको परमात्मा दुवारा दिव्या दृस्टि प्राप्त होती है जिसके बाद वो सारे संसार को एक रूप में देखने लगता है, अब उसके मन के सारे विकार नष्ट होने लगते है। 

पुराण के अनुसार 2 यमदूत आते है जो दिखने में काफी भयानक होते है वे उस वियक्ति के साथ वैसा ही बर्ताव करते है जैसा उसने जीवन में अन्य लोगो के साथ किया था यदि मरने वाला प्राणी सच्चा है तो वो आसानी से अपने प्राण त्याग देता है, लेकिन अगर वो पापी है तो यमदूत के डर से पीड़ा से प्राण त्याग देता है। 

उसके बाद यमदूत उसके गले में (पाश) बांध कर यमलोक की और लेजाते है, वो डरता-डरता आगे बढ़ता है यमलोक पोहचने पर पापी जीव को यातनाये दी जाती है। फिर उसको यमराज के कहने पर 13 दिनों तक के लिए अपने उत्तर कार्यो की पूर्ति के लिए घर पर छोड़ दिया जाता है। घर आकर आत्मा अपने शरीर में घुसने का प्रयास करती है लेकिन यमदूत के (पाश) से मुक्त नहीं हो पाती। 

जब तक उस आत्मा के परिवार वाले उसका पिंड-दान नहीं करते है तब तक वो आत्मा भूखी प्यासी रहती है। दसवे दिन किये पिंड दान से उस आत्मा को चलने की शक्ति मिलती है, तेहरवे दिन यमदूत उसको फिर से पकड़ कर यमलोक लेजाते है। 


जिसमे आत्मा को तीन प्रकार के मार्ग मिलते है -


(1) अर्चि मार्ग - यह मार्ग देव लोक और ब्रह्मा लोक के लिए होता है, इसको सबसे सर्वोच्च मार्ग माना गया है। 


(2) धूम मार्ग -  यह मार्ग पितृ लोक की यात्रा के लिए होता है। 


(3) उतपत्ति विनाश मार्ग - जो नर्क की यात्रा के लिए होता है, और इसको सबसे खराब मार्ग मन गया है, इसमें आत्मा को वैतरणी नदी का सामना करना पड़ता है, जिसको पार करने में 47 दिनों का समय लगता है और 47 दिनों का ये सफर बड़ा कष्ट दायी होता है। इस तरह भूक प्यास से बैचैन आत्मा यमलोक पौह्चती है वह भगवान चित्र गुप्त उस प्राणी के कर्मो का लेखा जोखा धर्मराज को बताते है, फिर उसी के आधार पर यमराज आत्मा को उसके कर्मो के दंड के लिए नर्क भेजते है। गरुड़ पुराण में लग-भग  36 प्रकार के नार्को के बारे बताया गया है जो मनुष्य के सोच से भी ज्यादा भयानक है।


इसके अलावा जो जीव आत्मा अच्छे कर्म करता है वह सीधे स्वर्ग जाता है और स्वर्ग के सारे सुख भोगता है, ऐसे मनुष्य अपनी इच्छा अनुसार नया जीवन प्राप्त कर सकते है, या फिर जन्म/मृत्यु के बंधनो से मुक्त होकर सीधे परमात्मा में वलीन हो जाते है।  


स्वर्ग, नर्क, पाप, पुण्य के अलावा गरुड़ पुराण में बताई गयी बाते - 

गरुड़ पुराण में मौत के रहस्य के साथ जीवन के रहस्य ज्ञान, विज्ञानं, निति, नियम, के बारे में भी बताया गया है। लेकिन फिर भी कुछ लोगो का यह मानना है की इसको जीवित रहते नहीं पड़ना चाहिए और लोगो के मन में भी डर फैलाया गया है अगर कोई इंसान इसको जीवित पड़ता है, या अपने घर पर यह पुराण रखता है तो उसके जीवन में असुब घटनाये होती रहती है। 

लेकिन ऐसा नहीं है इसमें ऐसी-ऐसी बातो का उल्लेख है जो जीवित मनुष्य के बारे में बताया गया है, मनुष्य के जीवन में अन्धकार को मिटने के लिए भये मुक्त करने के लिए बाते कही गयी है। गरुड़ पुराण के शुरुवात में ही इसके पाठ करने के महत्व के बारे में बताया गया है। 

यदि कोई मनुष्य अपने जीवन में इस पुराण का पाठ करता है तो विद्या, यश, सौंदर्य, लक्ष्मी, विजय और आरोग्य के विषय में ज्ञान की प्राप्ति होती है। जो मनुष्य इसका नियमित पाठ करता है या फिर सुनता है उसको महा-ज्ञान की प्राप्ति होती है और अंत में उसको स्वर्ग की प्राप्ति होती है, साथ ही साथ भोग और मोक्ष की प्राप्ति भी होती है।

इसका पाठ करने से पुत्र चाहने वाला पुत्र की प्राप्ति करता है, कामना वाला अपनी कामना को प्राप्त करता है। जो मनुष्य इसके एक श्लोकः का पाठ करता है उसकी अकाल मृत्यु नहीं होती, विष्णु धर्म के प्र्दशन में गरुड़ पुराण के समान कोई दूसरा पुराण नहीं है।


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