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सूर्य नमस्कार क्या है, यहाँ कैसे करते है और सूर्य नमस्कार करने के क्या फायदे है।(What is Surya Namaskar, Benefits of Surya Namaskar in Hindi)

हमारे देश में विभिन्न प्रकार के योग किये जाते है जिसमे से की एक होता है सूर्य नमस्कार, यहाँ एक प्रकार की शारीरिक किर्या होती है जिसको हम सूर्य भगवान के उदय के समय करते है। बारह तरीको से इस योग क्रिया को किया जाता है, यहाँ योग बच्चा, बुड्ढा, महिला, पुरुष हर आयु के इंसान कर सकते है।  


What is Surya Namaskar, Benefits of Surya Namaskar in Hindi



सूर्य नमस्कार क्या है(What is Surya Namaskar in Hindi)


सूर्य नमस्कार 12 विभिन्न शक्तिशाली आसनो का मिश्रण है, यह आसन आपके शरीर को सही आकार देने और मन को शांत व स्वस्थ रखने का उत्तम तरीका है। इसके पूर्ण चक्र में बारह आसन होते है, सूर्य नमस्कार सुबह खाली पेट करना उचित होता है। अपने सामर्थ के अनुसार आप 4-6 आसन प्रतिदिन कर सकते है। 



सूर्य नमस्कार के 12 आसन(12 Steps of Surya Namaskar in Hindi)


12 Steps of Surya Namaskar in Hindi



1 - प्रणाम आसन

इस आसन में आप चटाई पर हाथ जोड़ के सीधे खड़े हो जाएँ, अपने पैरो के दोनों पंजो को एक साथ मिला ले, अपने कंधे को ढीला रखे साँस लेते हुए दोनों हाथ बगल से ऊपर उठाएँ और साँस छोड़ते हुए हथेलियों को जोड़ते हुए छाती के सामने नमस्कार मुद्रा में ले आएँ।

2 - हस्तउत्तानासन

इस आसन में सांस लेते समय दोनों हाथों को ऊपर उठाये अपने कानो तक अपने हाथो को ले जाए, जितना हो सके पीछे की तरफ झुके, घुटने और कहुनियो को सीधा रखे। 

3 - हस्तपादासन

इस योग में सीधे खड़े हो कर सांस छोड़ते हुए दोनों हाथो को पाँव के पंजो के पास रखते हुए भूमि में लगाते है, अपने घुटनो को सीधा रखे तथा अपने माथे को घुटनो से लगाने का प्रयास करे। 

4 - अश्व संचालन

सांस लेते हुए बांये पैर को पीछे ले जाए और उसके घुटने को जमीन में लगाये, अपने हाथो को जमीन पर ही रखे, दांये पैर को अपने दोनों हाथो के बीच में रखे और गर्दन को ऊपर उठाये तथा निचली कमर को अंदर दबाये।   

5 - दंडासन

इस आसन के दौरान चटाई में सीधे खड़े हो जाए फिर सांस लेते वक्त अपने दोनों हाथो को जमीन में रखे, अब सांस छोड़े और अपने दोनों पैरो को धीरे-धीरे पीछे की और ले जाए, अपने शरीर को सीधा रखे और मूह को सामने रखे कुछ देर रहने के दौरान अपनी पुनर अवस्था में आ जाए। 

6 - अष्टांग नमस्कार

अष्ट+अंग आठ शरीर के अंग भूमि में लगते है इस आसन को करते हुए, जमीन पर मुंह रख के लेटना होता है अपने कूल्हों को ऊपर उठाना होता है, इस दौरान छाती ठुड्डी और घुटने जमीन पर ही लगे होने चाहिए। 

7 - भुजंगासना

इस आसन में शरीर को जमीन में लिटा कर शरीर का ऊपरी हिस्सा अपने हाथो की मदद से उठाना होता है और बाकी निचला हिस्सा जमीन में ही रहता है और ऊपर की और देखना होता है।

8 - पर्वतासन

इस आसन में सीधे खड़े होकर अपने दोनों हाथो को जमीन में रख कर अपने मुह को दोनों हाथो के बीच में रखना होता है, इस आसन में हाथ और पाँव ही जमीन में रहते है के आकार मे रहना होता है। 

9 - अश्व संचालन

यहाँ आसन भी चौथे नंबर में बताये आसन की तरह करना होता है बस बांये की जगह दांये पैर का इस्तेमाल किया जायेगा। 

10 - हस्तपादासन

तीसरे नंबर के आसान की प्रक्रिया को दोहराये। 

11 - हस्तउत्तानासन

दूसरे नंबर के आसान की प्रक्रिया को दोहराये। 

12 - ताड़ासन

यहाँ सूर्य नमस्कार के आसनों का आखिरी चरण है, इस आसन में एक दम सीधे खड़े होकर अपने शरीर को आराम देते है। 





सूर्य नमस्कार करने के फायदे(Benefits of Surya Namaskar in Hindi) 


  • सूर्य नमस्कार से हमारे शरीर की समस्त अंतः स्रावी ग्रंथियाँ सक्रिय हो जाती है और इससे निकलने वाले विभिन्न हारमोन्स का नियमन होता है।
  • मोटापे से परेशान लोग अगर रोजाना सूर्य नमस्कार नियमित रूप से करे तो मोटापा कम करने में बहुत मदद मिलती है। 
  • इससे हमारे शरीर को शक्ति और ऊर्जा प्राप्त होती है। 
  • इस योग को रोजाना करने से ब्लड शुगर, चिंता, गुर्दे से जुड़ी बीमारी और अन्य तरह की बीमारियों से निजात पा सकते हैं। 
  • इस योग से हमारे शरीर के सारे अंगों की मांसपेशियां मजबूत और ताकतवर बनती है। 






सूर्य नमस्कार मंत्र(Surya Namaskar Mantra)


  1. ॐ मित्राय नमः (सबके मित्र को प्रणाम/Who is friendly to all)
  2. ॐ रवये नमः (प्रकाशवान को प्रणाम/The shining one, the radiant one)
  3. ॐ सूर्याय नमः (क्रियाओं के प्रेरक को प्रणाम/Who is the dispeller of darkness and responsible for bringing activity)
  4. ॐ भानवे नमः (प्रदीप्त होने वाले को प्रणाम/One who illumines, the bright one)
  5. ॐ खगाय नमः (आकाशगामी को प्रणाम/Who is all-pervading, one who moves through the sky)
  6. ॐ पूष्णे नमः (पोषक को प्रणाम/Giver of nourishment and fulfillment)
  7. ॐ हिरण्यगर्भाय नमः (स्वर्णिम् विश्वात्मा को प्रणाम/Who has golden color brilliance)
  8. ॐ मरीचये नमः (सूर्य रश्मियों को प्रणाम/The giver of light with infinite number of rays)
  9. ॐ आदित्याय नमः (अदिति-सुत को प्रणाम/The son of Aditi, the cosmic divine Mother) 
  10. ॐ सवित्रे नमः (सूर्य की उद्दीपन शक्ति को प्रणाम/One who is responsible for life)
  11. ॐ अर्काय नमः (प्रशंसनीय को प्रणाम/Worthy of praise and glory)
  12. ॐ भास्कराय नमः (आत्मज्ञान-प्रेरक को प्रणाम/Giver of wisdom and cosmic illumination)


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